Wednesday, November 15, 2017

सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण

सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण


हमारे भारत में हर मौसम में खान-पान से जुड़ी कुछ परंपराएं है जिन्हें हम निभाते भी आ रहे हैं पर पता नहीं है कि क्यों? ऐसी ही एक परंपरा है ठंड में तिल के सेवन की। हमारे यहां सर्दियों में तिल का उपयोग कई तरह से किया जाता है। दरअसल तिल के ये छोटे-छोटे दाने सेहत से भरपूर हैं। इसलिए तिल का प्रयोग घी व गुड़ के साथ करने से वर्षभर कई तरह के रोग दूर रहते हैं। साथ ही घर में बनी तिल पट्टी व बिजौरे भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

- यदि किसी को बार-बार यूरिन आने या खुलकर यूरिन न आने की समस्या है तो उसे पांच ग्राम तिल और पांच ग्राम गौखरू का काढा बनाकर दें। आराम मिलेगा। तिल के तेल में नीम की पत्तियां डालें। इस तेल की मालिश से मुंहासे व चर्म रोग से निजात मिलती है। तिल के तेल से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है।

- तिल में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्व पाए जाते हैं। तिल का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती।

- तनाव आज की भाग-दौड़ भरी जीवन शैली का हिस्सा बन गया है लेकिन तिल के रोजांना इस्तेमाल से तनाव भी कम होता है। और साथ शरीर को हल्का महसूस होता है। तिल थकान और अनिद्रा जैसी कई छोटी-छोटी बीमारियों से निजात दिलाता है। और शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।


- तिल में एक खास तरह का एंटीऑक्सिडेंट होता है,जो कैंसर को जन्म देने वाले फ्री रैडिकल्स से छुटकारा दिलवाने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर में फैटी एसिड्स के निर्माण को कम करता है जिससे वजन बढऩे का खतरा कम हो जाता है। तिल के तेल का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के ब्यूटी ट्रीटमेंट्स में किया जाता है।तेल से त्वचा स्वस्थ होती है और बाल भी मजबुत होते है। इसके अलावा तिल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से आखों के नीचे पडऩे वाले काले घेरों से छुटकारा मिलता है।

- पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये भी तिल का उपयोग किया जाता है। इसके लिए समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फि र इस मिश्रण के बराबर तिल लेकर उसे भी कूट पीसकर इसी मिश्रण में मिला लें अब इस मिश्रण में आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें। सुबह-सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।





सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण

सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण


हमारे भारत में हर मौसम में खान-पान से जुड़ी कुछ परंपराएं है जिन्हें हम निभाते भी आ रहे हैं पर पता नहीं है कि क्यों? ऐसी ही एक परंपरा है ठंड में तिल के सेवन की। हमारे यहां सर्दियों में तिल का उपयोग कई तरह से किया जाता है। दरअसल तिल के ये छोटे-छोटे दाने सेहत से भरपूर हैं। इसलिए तिल का प्रयोग घी व गुड़ के साथ करने से वर्षभर कई तरह के रोग दूर रहते हैं। साथ ही घर में बनी तिल पट्टी व बिजौरे भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

- यदि किसी को बार-बार यूरिन आने या खुलकर यूरिन न आने की समस्या है तो उसे पांच ग्राम तिल और पांच ग्राम गौखरू का काढा बनाकर दें। आराम मिलेगा। तिल के तेल में नीम की पत्तियां डालें। इस तेल की मालिश से मुंहासे व चर्म रोग से निजात मिलती है। तिल के तेल से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है।

- तिल में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्व पाए जाते हैं। तिल का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती।

- तनाव आज की भाग-दौड़ भरी जीवन शैली का हिस्सा बन गया है लेकिन तिल के रोजांना इस्तेमाल से तनाव भी कम होता है। और साथ शरीर को हल्का महसूस होता है। तिल थकान और अनिद्रा जैसी कई छोटी-छोटी बीमारियों से निजात दिलाता है। और शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।


- तिल में एक खास तरह का एंटीऑक्सिडेंट होता है,जो कैंसर को जन्म देने वाले फ्री रैडिकल्स से छुटकारा दिलवाने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर में फैटी एसिड्स के निर्माण को कम करता है जिससे वजन बढऩे का खतरा कम हो जाता है। तिल के तेल का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के ब्यूटी ट्रीटमेंट्स में किया जाता है।तेल से त्वचा स्वस्थ होती है और बाल भी मजबुत होते है। इसके अलावा तिल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से आखों के नीचे पडऩे वाले काले घेरों से छुटकारा मिलता है।

- पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये भी तिल का उपयोग किया जाता है। इसके लिए समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फि र इस मिश्रण के बराबर तिल लेकर उसे भी कूट पीसकर इसी मिश्रण में मिला लें अब इस मिश्रण में आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें। सुबह-सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

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Tuesday, October 31, 2017

माइग्रेन पर नियंत्रण पाना


माइग्रेन या आधासीसी का दर्द मधुमेह तथा दमे की बीमारी से भी ज्यादा पाया जाता है परंतु चालीस लाख भारतीयों में से सिर्फ दो प्रतिशत ही ऐसे हैं जो इस रोग का पूर्ण रूप से इलाज करवाते हैं। पुरुषों की तुलना में माइग्रेन महिलाओं को ज्यादा होता है। कुछ अध्ययन दर्शाते हैं कि प्रत्येक चार में से एक गर्भवती महिला इसका शिकार बनती है। अध्ययन में यह भी पता चला कि पुरुष तो इसका इलाज कराने को तत्पर रहते हैं परंतु महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। वे या तो इस दर्द को झेलती रहती हैं या फिर दर्द निवारक गोलियों का सहारा लेकर इससे छुटकारा पा लेना चाहती हैं।
अध्ययन के मुताबिक बहुत से लोग इसे मानसिक अवस्था के कारण हुई शारीरिक परेशानी मानकर टालते रहते हैं और इसका इलाज कराने की जरूरत नहीं समझते परंतु आगे चलकर इससे कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार यह दर्द शरीर में सिरोटोनिन नामक कैमिकल के स्तर में बदलाव होने से उत्पन्न होता है जो रक्तवाहिनियों को प्रभावित करता है। 
जब सिरोटोनिन का स्तर ज्यादा होता है, रक्त वाहिनियों में द्वंद्व-सा छिड़ जाता है, जब वह स्तर कम होता है तो रक्त वाहिनियां फैल जाती हैं जो दर्द का कारण बनती हैं। सिरोटोनिन का स्तर कई बातों से प्रभावित होता है, जैसे नींद की कमी, तनाव व चिंता, अत्यधिक धूप में रहना, मसालेदार भोजन का सेवन, रैड वाइन व चाकलेटयुक्त पदार्थों का सेवन आदि। महिलाओं में यह एस्ट्रोजन नामक हार्मोन के स्तर में बदलाव आने से पैदा होता है। 
जीवनशैली में बदलाव लाने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है परंतु अफसोस की बात यह है कि लोग दर्दनिवारक दवाइयों का लगातार सहारा लेते रहते हैं। डाक्टरों के मुताबिक दर्द निवारक दवाइयों का अधिक सेवन आगे चल कर गुर्दे की खराबी का कारण बन सकता है अत: जहां तक हो सके, दर्द निवारक गोलियां लेने से बचें तथा माइग्रेन का सही कारण पता लगाकर उसका इलाज कराएं।