Saturday, February 8, 2014

जैतून का तेल 


         ऑलिव ऑयल का प्रयोग शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. ऑलिव आयल यानी जैतून का तेल त्वचा के लिए फायदेमंद है. ऑलिव ऑयल में फ्लेवसेनॉयड्‌स स्कवेलीन और पोरीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्‌स होता है जो फ्री रैडिकल्स से कोशिकाओं को समाप्त होने से बचाता है. सर्दियों और गर्मियों के मौसम में यह रूखी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. इसका प्रयोग करने से बालों से डैंड्रफ समाप्त होता है. झुर्रियों को समाप्त करने के लिए यह बहुत उपयोगी है. शरीर के हर अंग में इस ऑयल का प्रयोग किया जा सकता है. खाने में इसे शामिल कर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है.

त्वचा के लिए 

नहाने के बाद शरीर पर ऑलिव ऑयल लगाएं, इससे शरीर से काले धब्बे समाप्त होंगे और त्वचा में दिनभर निखार रहेगा. चेहरे और गर्दन पर ऑलिव ऑयल लगाइए, इससे चेहरे पर रौनक आएगी और गर्दन का कालापन दूर होगा. काली त्वचा और काली कुहनियों की समस्या है तो चीनी को ऑलिव ऑयल में मिलाकर हर रोज 5 मिनट तक स्क्रब कीजिए.
टैन्ड स्किन के लिए
नहाने के बाद हर रोज 20 मिनट तक ऑलिव ऑयल से मसाज करने से स्किन की टैनिन में आराम मिलेगा. चंदन के पाउडर में 2-3 बूंदे ऑलिव ऑयल की डालकर 7-10 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दीजिए, इससे बाद धुल लीजिए. ऑलिव ऑयल को चेहरे पर लगाकर भाप लीजिए, इससे त्वचा की टैनिन की समस्या समाप्त होगी.
झुर्रियों के लिए
नींबू के रस में ऑलिव ऑयल को मिला कर हफ्ते में तीन बार चेहरे की मालिश कीजिए इससे झुर्रियों से निजात मिलेगी. चेहरे पर अगर झुर्रियां हैं तो ऑलिव ऑयल को चंदन के पाउडर के साथ मिला कर 10 मिनट तक लगा रहने दीजिए. ऑलिव ऑयल की 2-3 बूंदों को फेस पैक में मिला कर चेहरे पर हर रोज 20 मिनट तक लगा रहने दीजिए, एक महीने में झुर्रियों से निजात मिलेगी.
बालों के लिए
बालों में ऑलिव ऑयल लगाने से बालों की कंडीशनिंग अच्छी होती है. थोडा सा ऑलिव ऑयल अपने हाथों में लेकर लगाइए, इससे बाल मुलायम और सिल्की हो जाएंगे. बालों में अगर डैंड्रफ की समस्या है तो ऑलिव ऑयल का प्रयोग करने से यह डैंड्रफ कम हो जाएंगे.
होठों के लिए
अगर आपके होठ रूखे और बेजान हैं, तो होठों पर हर रोज ऑलिव ऑयल से मालिश कीजिए, होठ कोमल हो जाएगें. फटे होठों पर सुबह-शाम ऑलिव ऑयल लगाइए. फटे होठों से निजात मिलेगी.
नाखूनों के लिए
अगर आपके नाखून बहुत कठोर हैं तो ऑलिव ऑयल के प्रयोग से नाखूनों को लचीला बनाया जा सकता है. हर रोज करीब आधे घंटे नाखूनों को ऑलिव ऑयल में डूबोकर रखिए, इससे नाखून नरम और लचीले हो जाएंगे. पैरों पर ऑलिव ऑयल लगाकर सोने से पैर कोमल बनते हैं.
दिल के लिए
ऑलिव ऑयल को खाने में मिला कर खाने से दिल मजबूत होता है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम होती है. ऑलिव ऑयल खाने से रक्त संचार अच्छे से होता है जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रण किया जा सकता है.
ऑलिव ऑयल कैसे प्रयोग करें
ऑलिव ऑयल का प्रयोग खाना बनाने में किया जा सकता है. सलाद में ऑलिव ऑयल मिलाकर खाया जा सकता है. ब्रेड की स्लाइस पर ऑलिव ऑयल को लगाकर खा सकते हैं.

Saturday, January 25, 2014

स्वास्थ्य रक्षक कविता

स्वास्थ्य रक्षक कविता ( १ )

अरहर दाल जलाय के, दधि में देय मिलाय |
पकी खाज पर लेपिये देवे रोग मिटाय ||

गुड़ तोला प्राचीन ले, चूना माशा चार |
दोउ मिलाकर खाइए, देवे दर्द मिटाय ||

त्रिफला काला नमक को, पानी साथ सनाय |
सबहिं बराबर मापकर, नीबू रस मिलवाय ||
झरबेरी सी गोलियाँ, घोंट पीस बनवाय |
दो गोली सेवन करें, भूख बहुत बढ़ जाय ||

पत्ती पीसें नीम की, लीजै रस निकाल |
आधा तोला पीजिए, पेट कीट मिट जाय ||

पत्ती पीसें नीम की, लीजै रस निकाल |
आधा तोल पीजिये, पेटकीट मिट जाय ||


स्वास्थ्य रक्षक कविता  (२)

दिन   में तो  चंदा चलै ,चलै  रात में  सूर |

तो यह निश्चय जानिये,  प्राण गमन बहु दूर||

बायीं  करवट   सोइये,  जल  बायें स्वर  पीव |

दायें स्वर  भोजन करै,  सुख  पावत है  जीव ||

अधिक गर्म जो पेय पिये, और अन्न जो खाय | 

वृद्धावस्था  के  पूर्व ही, बत्तीसी झड़ जाय || 

जो दातून   बबूल की ,नित्य करै  मन लाय |

टीस मिटै  मजबूत हो, पायरिया  मिट जाय ||

नीम   दतूनी  जो करै, भूनी अन्न   चबाय  |

दूध बयारी जो करै,ता घर वैद्य न जाय  ||

 स्वास्थ्य रक्षक कविता…( २  )

इमली पत्ती पीसकर, लीजै नमक मिलाय |

मट्ठा के सग पीजिये,   पेचिस देय मिटाय ||

नीम की पत्ती तोड़कर,   मधुरस संग पिसाय |

फोड़ा ऊपर बांध दे, मव (पीब) को देत बहाय ||

हर्र बहेरा आँवला,  घी शक्कर संग खाय  |

हाथी दाबे कांख में,   साठ कोस ले जाय ||

जो ताम्र  के पात्र में,    पिये रोज जल छान |

चर्म रोग सब दूर हों, मनुष्य होत बल्वान ||

पीली पात मदार (आक) में,  दीजै घृत लगाय |

गरम-गरम रस डालिए कर्ण-रोग मिट जाय ||

Monday, December 30, 2013

आंसुओं के मोल 


हम यह भी क्यों भूलें कि हँसकर यदि मनुष्य दूसरों की सुख-वृद्धि करता है,तो रोकर वह दूसरों के दुःख बाँट लेता है.आंसू की सबसे बड़ी विशेषता उसका कल्याणकारी रूप है.वह मनुष्य को अकर्मण्य नहीं बनाता.वेदना से निःसृत आँसुओं की तरलता,अंतर्ज्वाला को शांत कर जीवन को प्रकाश देती है.इसलिए महाकवि जयशंकर प्रसाद ने ‘आंसू’ में विश्वबंधुत्व के दर्शन किये हैं,और यही आंसू कवि के जीवन की मूल प्रेरणा है..........

जो घनीभूत पीड़ा थी
मस्तक में स्मृति-सी छायी
दुर्दिन में आंसू बनकर
वह आज बरसने आयी
सबका निचोड़ लेकर तुम
सुख से सूखे जीवन में
बरसो प्रभात हिमकण-सा
आंसू इस विश्व-सदन में

३१.१२.२०१३ 

विज्ञान


अंतरिक्ष के राज खोलता 2014

दो दो बार पूर्ण चंद्रग्रहण, भारत के मंगलयान की लाल मिट्टी को छूती तस्वीरें और धूमकेतु के बारे में बहुत कुछ नया जानने का मौका. अंतरिक्ष की दुनिया के अनजाने रहस्यों में से कुछ 2014 में खुल सकते हैं.
करेंगे मंगल ग्रह की सतह का नक्शा तैयार 

साल की शुरुआत होगी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक उपग्रह रोसेटा के सफर से. रोसेटा ऐसा उपग्रह है जो कॉमेट या धूमकेतु का पीछा करता है. तीन साल से अंतरिक्ष में बेजान पड़े इस उपग्रह को दोबारा सक्रिय किया जाएगा.
इस यान को 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया और इसने अब तक सूरज का पांच बार चक्कर लगाया है. इसी दौरान रोसेटा अपने ऊर्जा के केंद्र से इतना दूर निकल गया कि उसकी सौर बैट्रियों का चार्ज होना बंद हो गया. इसके बाद ऊर्जा बचाने के लिए ही उसे सुषुप्तावस्था में रख दिया गया. आने वाली 20 जनवरी को रोसेटा को दोबारा जगाया जाएगा. उसे अपने अंतिम लक्ष्य चुरीयूमोव-गेरासिमेनको धूमकेतु की ओर कूच करना होगा. उपग्रह जब पूरी तरह चार्ज हो जाएगा, तो उसका एंटीना धरती को संकेत देने लगेगा. जर्मनी के डार्मश्टाट में बैठे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के वैज्ञानिकों का संपर्क उससे जुड़ जाएगा.
गर्मी में रोसेटा धूमकेतु तक पहुंच जाएगा और करीब एक साल तक चुरीयूमोव-गेरासिमेनको पर शोध करेगा. नवंबर में कॉमेट के केन्द्र पर एक खास यान भेजा जाएगा जो वहां मौजूद 450 करोड़ साल पुराने तत्वों का अध्ययन करेगा, जब हमारे सौरमंडल का जन्म हुआ था. इस अध्ययन से पता चल सकेगा कि धरती पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई.
नवंबर में कॉमेट के केन्द्र पर भेजा जाएगा एक खास यान

धरती से मंगल तक

दो खोजी यान अगले साल सितंबर में मंगल ग्रह तक पहुंच जाएंगे. एक है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का यान मावेन, जो धरती के पड़ोसी ग्रह के वातावरण पर शोध करेगा. दूसरा भारत का मंगलयान है, जो लाल ग्रह पर भेजा गया भारत का पहला यान है. मंगलयान के जरिए भारत अपनी तकनीकों का परीक्षण कर सकेगा और साथ ही देश को ग्रहों पर शोध का अनुभव भी मिलेगा. मंगलयान लाल ग्रह की कक्षा में पहुंचने पर उसकी तस्वीरें लेगा और मंगल की सतह का एक नक्शा भी तैयार करेगा.
अंतरिक्ष यात्री आलेक्सांडर गैर्स्ट छह महीने तक रहेंगे आईएसएस पर 

जर्मनी के लिए साल 2014 अंतरिक्ष यात्रा के लिहाज से खास होगा. अंतरिक्ष यात्री आलेक्सांडर गैर्स्ट मई में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) पर पहुंच जाएंगे और छह महीने तक वहीं रहेंगे. किसी जर्मन को आईएसएस में इतना लंबा समय बिताए छह साल हो चुके हैं. इससे पहले वहां लंबे समय तक रहने वाले जर्मन अंतरिक्ष यात्री थोमास राइटर अब यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मानव अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों को संभाल रहे हैं.
इस साल दिसंबर में चीन ने अपना पहला मानवरहित अंतरिक्ष यान चांगये-3 चांद पर उतार दिया. पिछले करीब चार दशक में पहली बार चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग हुई है. चीन ने यान का नाम चंद्रमा की देवी चांगये पर रखा है. यह यान करीब एक साल तक माप लेगा. यह अपने छोटे दूरबीन से अंतरिक्ष का निरीक्षण भी करेगा. चांगये-3 का रोवर युतू या जेड रैबिट अप्रैल 2014 तक सक्रिय रहेगा और सतह पर घूम कर उसकी माप लेता रहेगा.
चीन के चांगये-3 का रोवर युतू या जेड रैबिट अप्रैल 2014 तक सक्रिय रहेगा

चीन अंतरिक्ष की दुनिया में नए साल में और क्या करने वाला है, इस बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं. संभावना है कि चीन लोगों को तियानगोंग-1 अंतरिक्ष पर भेज सकता स्टेशन है. अमेरिका ने जिस तरह से एशियाई देशों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के साथ काम करने से रोका हुआ है उससे चीन अंतरिक्ष अभियानों में अलग थलग पड़ गया है. लेकिन जनवरी में वॉशिंगटन में स्पेस मैपिंग पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चीन भी हिस्सा लेने वाला है.

जगमगाएगा आसमान

आने वाले साल में आसमान की ओर निहारने वालों को बहुत से सुंदर नजारे दिखाई देंगे. हमारे सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र, मार्च के आखिरी हफ्ते में सूर्य से पश्चिम दिशा में अपनी सबसे दूर की स्थिति में चला जाएगा. इसकी वजह से शुक्र ग्रह जो सूर्योदय के पहले दिखने के कारण सुबह का तारा नाम से भी जाना जाता है, करीब दो घंटे पहले ही आसमान में दिखाई दे जाएगा.
अप्रैल की शुरुआत में मंगल ग्रह भी रात के आसमान में काफी चमकता हुआ दिखेगा क्योंकि वो भी कई सालों के बाद सूर्य से सबसे दूर की स्थिति में पहुंचेगा. अगस्त के महीने में तो नजारा और भी दिलचस्प होगा जब आसमान के सबसे चमकीले ग्रह एक साथ आ जाएंगे. शुक्र और वृहस्पति आपस में इतने करीब होंगे कि नंगी आंखों से देखने पर एक ही चमकीले पिंड जैसे नजर आएंगे.

होगा घुप अंधेरा भी

नए साल में दो पूर्ण चंद्रग्रहण होंगे तो दो आंशिक सूर्यग्रहण भी लगेंगे. पहला पूर्ण चंद्रग्रहण पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागरीय देशों, उत्तर और दक्षिण अमेरिकी देशों से 15 अप्रैल को देखा जा सकेगा. आठ अक्टूबर को एक बार फिर चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश कर जाएगा जिससे ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागरीय देशों, उत्तर और दक्षिणी अमेरिकी देशों के अलावा पूर्वी एशियाई देशों में भी लोग पूर्ण चंद्रग्रहण देख पाएंगे.
चंद्रमा 29 अप्रैल को पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरेगा जिससे अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया में आंशिक सूर्यग्रहण की स्थिति बनेगी. उत्तरी अमेरिका और रूस के सुदूर पूर्व में 23 अक्टूबर को फिर आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा.

@Dr.J.P.Verma
31.12 2013

Sunday, December 29, 2013

सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण

 

सर्दियों में जरूर खाने चाहिए तिल, ये हैं कुछ खास कारण

हमारे भारत में हर मौसम में खान-पान से जुड़ी कुछ परंपराएं है जिन्हें हम निभाते भी आ रहे हैं पर पता नहीं है कि क्यों? ऐसी ही एक परंपरा है ठंड में तिल के सेवन की। हमारे यहां सर्दियों में तिल का उपयोग कई तरह से किया जाता है। दरअसल तिल के ये छोटे-छोटे दाने सेहत से भरपूर हैं। इसलिए तिल का प्रयोग घी व गुड़ के साथ करने से वर्षभर कई तरह के रोग दूर रहते हैं। साथ ही घर में बनी तिल पट्टी व बिजौरे भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

- यदि किसी को बार-बार यूरिन आने या खुलकर यूरिन न आने की समस्या है तो उसे पांच ग्राम तिल और पांच ग्राम गौखरू का काढा बनाकर दें। आराम मिलेगा। तिल के तेल में नीम की पत्तियां डालें। इस तेल की मालिश से मुंहासे व चर्म रोग से निजात मिलती है। तिल के तेल से कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है।

- तिल में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्व पाए जाते हैं। तिल का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती।

- तनाव आज की भाग-दौड़ भरी जीवन शैली का हिस्सा बन गया है लेकिन तिल के रोजांना इस्तेमाल से तनाव भी कम होता है। और साथ शरीर को हल्का महसूस होता है। तिल थकान और अनिद्रा जैसी कई छोटी-छोटी बीमारियों से निजात दिलाता है। और शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

- तिल में एक खास तरह का एंटीऑक्सिडेंट होता है,जो कैंसर को जन्म देने वाले फ्री रैडिकल्स से छुटकारा दिलवाने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर में फैटी एसिड्स के निर्माण को कम करता है जिससे वजन बढऩे का खतरा कम हो जाता है। तिल के तेल का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के ब्यूटी ट्रीटमेंट्स में किया जाता है।तेल से त्वचा स्वस्थ होती है और बाल भी मजबुत होते है। इसके अलावा तिल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से आखों के नीचे पडऩे वाले काले घेरों से छुटकारा मिलता है।

- पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये भी तिल का उपयोग किया जाता है। इसके लिए समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फि र इस मिश्रण के बराबर तिल लेकर उसे भी कूट पीसकर इसी मिश्रण में मिला लें अब इस मिश्रण में आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें। सुबह-सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।


Saturday, December 28, 2013

गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं,खांसी बहुत रहती है।

गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं,खांसी बहुत रहती है।

डॉ साहब नमस्कार

     मेरी बेटी को खांसी बहुत रहती है। खांसी सूखी है। बहुत इलाज करा चुका हूं। एलोपैथी भी और होम्योपैथी भी। कुछ फायदा होता है बाद में मर्ज फिर वही हो जाता है। बेटी की उम्र साढ़े आठ साल है। बचपन से ही उसके गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं। मैने मांटूर टेस्ट भी तीन बार करा लिया है। रिपोर्ट निगेटिव आती है। प्राइमरी कॉप्लेक्स की संभावना डॉक्टर बताते हैं मगर रिपोर्ट निगेटिव है। गले में टांसिल भी हैं। क्या इससे उसका विकास रुक सकता है। मैं काफी परेशान हूं। बेटी का किसी भी काम में मन नहीं लगता या यूं कहूं वह किसी भी काम में तल्लीनता से नहीं जुटती। कांफीडेंस की भी कमी है। आखिर मैं क्या करूं और क्या इन लक्षणों का बीमारी से कोई संबंध में मुझे दिशा दें।- जगदीश सिंह, देवरिया

       जगदीश जी,आपकी बेटी की समस्या को बहुत गम्भीरता से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि आपकी बेटी की समस्या जीर्ण हो चुकी है किन्तु जिस तरह से डाक्टर संभावना के आधार पर अनुमान लगा कर चिकित्सा करते हैं उससे प्रतीत होता है कि ऐसे डाक्टर बच्चों को मात्र प्रायोगिक जंतु ही समझते हैं। बच्ची के दोष जीर्ण हो कर परस्पर क्लिष्ट आवरणॊं में पहुंच चुके होने के कारण ही ऐसा होता है कि यदि लाक्षणि उपचार दे दिया जाए तो कुछ समय के लिये लाभ हो जाता है किंतु फिर वही समस्या अधिक जोर से उभर आती है। आप बच्ची को आधुनिक परीक्षणों की कसौटी पर घिसवाना बंद करिये इन परीक्षणों की हकीकत मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। किसी भी कार्य में तल्लीनता न आने का कारण ही यह है कि बच्ची जब खांसी से परेशान है तो उस उम्र की बच्ची क्या बड़े से बड़ा हठयोगी भी परेशान हो जायेगा और उसकी तल्लीनता भंग हो जाएगी। टांसिल में सूजन होना तो सहज बात है कि इस परिस्थिति में वह हो ही जाएगी। आप बच्ची को निम्न उपचार न्यूनतम छह माह तक दें-

      १ . रुदन्ती चूर्ण एक ग्राम + स्वर्णबसंत मालती रस १२५ मिग्रा + श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + सितोपलादि चूर्ण ५०० मिग्रा इन सबकी एक खुराक बना कर शहद के साथ दिन में इसी तरह तीन बार चटायें। दवा खाली पेट न दें।
      २. शिला सिंदूर ६५ मिग्रा + कांचनार गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें।
सुपाच्य आहार दीजिये,बाजारू चीजों से परहेज कराएं। जल्दी-जल्दी उपचार बदलना भी घातक सिद्ध होता है यह ध्यान रखिये।

Thursday, December 26, 2013

बहुमूत्र रोग की दवा

नुस्खे / Nuskhe : बहुमूत्र / CURE FOR EXCESSIVE URINATION ... दाती महाराज| यदि बार-बार पेशाब आता है, यदि बहुमूत्र रोग हो गया है तो उसके उपचार के लिए आंवले के पांच ग्राम रस में हल्दी की चुटकी घोलिए और उसमें पांच ग्राम शहद मिलाकर पी जाइये। ऐसा करने से जरा-जरा सी देर में पेशाब का आना बंद हो जाता है। -------------------------------------- For cure of excessive urination dissolve pinch of turmeric powder and five grams honey in five grams of anwala juice and drink. It will help in stopping frequent urination.